उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर विरलतम मंदिरों में है, जिसमें शेषनाग की छाया में शिव और पार्वती विराजे हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में सबसे ऊपर यानी तीसरे खंड में यह मंदिर स्थित है.

Nag Panchami: उज्जैन स्थित नाग चंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में एक बार नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं
पुराणों के अनुसार, इस मंदिर में नाग पंचमी के दिन पूजा करने से सर्पदोषों से मुक्ति मिलती है. हर साल हजारों की संख्या में नाग पंचमी के दिन श्रद्घालु यहां पहुंचते हैं. इस दिन श्रावण सोमवार भी है, इसलिए भगवान महाकाल के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर विरलतम मंदिरों में है, जिसमें शेषनाग की छाया में शिव और पार्वती विराजे हैं. द्वादश ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में सबसे ऊपर यानी तीसरे खंड में यह मंदिर स्थित है. 11वीं शताब्दी के इस मंदिर में नाग पर आसीन शिव-पार्वती की अतिसुंदर प्रतिमा है, जिसके ऊपर छत्र के रूप में नागदेवता अपना फन फैलाए हुए हैं. कहा जाता है कि दुनिया में यह एक मात्र ऐसा मंदिर है, जहां शिव और पार्वती की ऐसी अद्भुत प्रतिमा स्थापित है. इस मंदिर में दशमुखी नाग शैय्या पर भगवान शिव और पार्वती अपने पुत्र गणेश के साथ विराजमान हैं.
धार्मिक मान्यता है कि महादेव को खुश करने के लिए नागराज तक्षक ने कई सालों तक तपस्या की थी. नागराज की तपस्या से खुश होकर महादेव प्रकट हुए थे और नागराज को अमरत्व का वरदान दिया था. महादेव से आशीर्वाद मिलने के उपरान्त तक्षक ने शिवजी के सान्निध्य में वास करना शुरू कर दिया. इन्हीं कारणों से मंदिर में मूर्ति शिव तक्षक के साथ स्थापित की गई है.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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