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Skip to content Login   Sign Up   Go to Course Home Complete Lesson चालुक्य (Chalukyas) दक्षिण भारतात प्रतापी असलेल्या घराण्यांपैकी चालुक्य घराणे होते. हे घराणे मूळचे वातापीचे त्यानंतर त्याचे रूपांतर (वातापी-बदामी) (आजचे विजापूर-कर्नाटक), बदामीच्या चालुक्यात झाले. (७ व्या शतकातील पिष्टपूर राजधानी असलेले पूर्वेकडील चालुक्य, वेमुलवदाचे चालुक्य आणि कल्याणीचे चालुक्य अशा चालुक्य घराण्याच्या इतर शाखांही होत्या.) (बदामीचे चालुक्य घराण्यातील पहिला राजा जयसिंह होय. याच्याविषयी फारशी माहिती उपलब्ध नाही. त्याच्यानंतर त्याचा पुत्र रणराग गादीवर आला. या दोघांनी विजापूर जिल्ह्यातील वातापी → बादावी→ बदामी या राजधानी असलेल्या राज्यांत इसवी सनाच्या ६ व्या शतकात राज्य केले. या घराण्यातील राजांनी विंध्य पर्वत, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेशचा काही भाग या प्रदेशांवर सुमारे दोनशे वर्षे सत्ता गाजविली.) पहिला पुलकेशी (इ.स. ५३५ ते ५६६) – पहिला पुलकेशी (इ.स. ५३५ ते ५६६) हा चालुक्य घराण्यातील पराक्रमी आणि घराण्याचा वास्तव संस्थापक होय. त्याने अनेक मोहिमा यशस्वी केल्या व अश्वमेध यज्ञही केला. विजापूरनजीकच्या व...

अग्निकुल सिद्धांत के अनुसार #चार #क्षत्रिय #राजपूत_कुलों

  9+ 9+ 6 Rajputana Community - #अग्निकुल सिद्धांत के अनुसार #चार #क्षत्रिय #राजपूत_कुलों- *प्रतिहार, परमार, चौहान तथा चालुक्य (सोलंकी)* का उद्‌भव अाबू पर्वत पर वशिष्ठ द्वारा किए गए यज्ञ की अग्निकुण्ड से हुआ। प्र०-(प्रतिहार राजपूत) गुर्जर क्यों कहलाएे? 👉सोमदेव सूरी ने सन ९५९ में यशस्तिलक चम्पू में गुर्जर देश का वर्णन किया है। वह लिखता है कि न केवल प्रतिहार बल्कि चावड़ा,चालुक्य,आदि वंश भी इस देश पर राज करने के कारण गुर्जर कहलाये। 👉कुमारपाल प्रबंध के पृष्ठ १११ पर भी गुर्जर देश का वर्णन है. 👉👉ऐसे ऐसे बहुत सारे प्रूफ है 👉प्रतिहारों ने अरब आक्रमण कारीयों से भारत की रक्षा की अतः इन्हें "द्वारपाल"भी कहा जाता है। प्रतिहार गुर्जरात्रा प्रदेष (गुजरात) के पास निवास करते थे। अतः ये गुर्जर - प्रतिहार कहलाएं। गुर्जर प्रदेश का #स्वामी होने के कारण #प्रतिहार, गुर्जर प्रतिहार कहलाये। #गुर्जर_जाति से उनका #कोई_सम्बन्ध नहीं था। उनकी राजधानी मीनमाल भी आज के गुजरात के निकट ही स्थित है। #अरबी तथा #चीनी यात्रियों के विवरण में भी गुर्जर को एक क्षेत्र विशेष ही माना गया है। 'उपमितिभन प्रंपचा...

कर्नल जेम्स टोड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण

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indianhistory   ALL ABOUT INDIAN HISTORY Home OCT 23 कर्नल जेम्स टोड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण | Inscription of Gurjar History by Rajput Historian James Tod कर्नल जेम्स टोड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण | Inscription of Gurjar History by Rajput Historian James Tod कर्नल जेम्स टोड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण | INSCRIPTION OF GURJAR HISTORY BY RAJPUT HISTORIAN JAMES TOD  • कर्नल जेम्स टोड कहते है कि राजपूताना कहलाने वाले इस विशाल रेतीले प्रदेश अर्थात राजस्थान में, पुराने जमाने में राजपूत जाति का कोई चिन्ह नहीं मिलता परंतु मुझे सिंह समान गर्जने वाले गुर्जरों के शिलालेख मिलते हैं। • प्राचीन काल से राजस्थान व गुजरात का नाम गुर्जरात्रा (गुर्जरदेश, गुर्जराष्ट्र) था जो अंग्रेजी शासन मे गुर्जरदेश से बदलकर राजपूताना रखा गया। Posted  23rd October 2016  by Unknown   5   View comments OCT 23 पं बालकृष्ण गौड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण | Description of Gurjar inscription by Pandit Balkrishna God पं बालकृष्ण गौड द्वारा गुर्जर शिलालेखो का विवरण | Descriptio...